लोहड़ी 2020: लोहड़ी क्या है? जानिए क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का त्योहार ?

लोहड़ी 2020: लोहड़ी क्या है? जानिए क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का त्योहार ?

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Lohri Festival 2020: प्रिय पाठक आप सबों ने लोहड़ी का त्योहार के बारे में तो अच्छे से जानते ही होंगे। पर क्या आपको पता है कि लोहड़ी क्या है? लोहड़ी का त्योहार क्यों मनाया जाता है। आइये इस पोस्ट में हम आपको पूरी detail के साथ knowlede शेयर करने वाले हूँ जिसके बाद लोहड़ी से related आपके सारे doubt clear हो जाएंगे।

आइये जानते हैं की लोहड़ी का त्योहार क्या है? इस त्योहार को क्यों मनाया जाता है? और इस लोहड़ी त्योहार का क्या महत्व है?

 

लोहड़ी क्या है? ( What is Lohri )

 

लोहड़ी हर वर्ष 13 जनवरी को मनाया जाता है। यह मुख रूप से सिख समुदाय का महत्वपूर्ण त्योहार है। इस त्योहार को पंजाब और हरियाणा के लोग बड़े ही धूम धाम से मनाते हैं। इसे आप मकर संक्रांति का दूसरा प्रारूप भी बोल सकते हो। इस दिन लोग आपस में मिल जुल कर एक दूसरे के साथ खुशियां बंटाते हैं। इस पर्व को सर्दी को जाने का और बसंत के आने का संकेत भी माना जाता है।

 

लोहड़ी कब मनाया जाता है? ( When is Lohri Celebrated )

 

लोहड़ी का त्योहार मकर संक्रांति के just 1 दिन पहले यानी कि 13 जनवरी को मनाया जाता है। लोहड़ी के इस दिन का अपना एक विशेष महत्व इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस दिन पौष माह का अंत और माघ महीने की शुरुआत होती है। लोहड़ी के रात को साल का सबसे बड़ी रात भी माना जाता है।

लोहड़ी पर्व का एक स्पेशल महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह किसान के फसल के कटाई और बुनाई को लेकर भी चर्चा में है। इस दिन पर किसान अपने फसल जैसे तिल, मक्का, सरसों, गेहूं, चना आदि को अग्नि समर्पित करते हुए भगवान को प्रकट करते हैं।

 

लोहड़ी का अर्थ क्या है? ( What is the meaning of Lohri )

 

लोहड़ी हिन्दुयों द्वारा मनाया गया एक पावन त्योहार में से एक हैं। लोहड़ी तीन शब्दों के मेल से बना हुआ हुआ है और सबका अपना एक अलग अर्थ ( meaning ) है।

लोहड़ी शब्द का अर्थ
ल – लकड़ी
ओह – जलते हुए उपले ( इसे गोह भी कहते हैं )
ड़ी – रेवड़ी
लोहड़ी को कई अलग अलग नाम से भी जाना जाता है जैसे लोहिता, लाल लाही, खिंचवाड़

 

लोहड़ी का त्योहार क्यों मनाया जाता है? ( Why Lohri is Celebrated )

लोहड़ी के त्योहार क्यों मनाया जाता है इसके पीछे कई किस्से, कहानियां बताए जाते हैं। इसके पीछे एक पौराणिक कहानी और ऐतिहासिक कहानी भी मशहूर है।

 

दरअसल पुराणों के अनुसार लोहड़ी के त्योहार को सती के त्याग के रूप में हर वर्ष मनाया जाता है। कहानी के अनुसार जब प्रजापति दक्ष ने अपनी पुत्री सती के पति महादेव शिव का अपमान ( तिरस्कार ) किया था। और ऐसे में उनकी पुत्री ने बात न माना और अपने आपको अग्नि में समर्पित कर दिया था। यही वजह है कि उसके बाद से हर वर्ष इस दिन को लोहड़ी त्योहार के रूप में मनाया जाता है।

 

इसके पीछे एक दूसरी कहानी भी है जो कि ऐतिहासिक है। आइये जानते हैं..

 

आपको बता दें कि यह कहानी अकबर के शासनकाल की हैं। इस कहानी को दुल्ला भट्टी के नाम से भी जाना जाता है। दुल्ला भट्टी यानी कि उस समय यह पंजाब प्रान्त का सरदार हुआ करता था।अकबर के शासन काल में ही संदलबार नाम का एक जगह था जो हाल में पाकिस्तान का हिस्सा हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि ऊबर के शासन काल मे संदलबार नाम के जगह में लड़कियों का बाजार लगता था। तब दुल्ला भट्टी ने इसका विरोध किया और लड़कियों को सम्मानपूर्वक इस दुष्कर्म से बचाने में मदद किया। और यही नहीं सारी लड़कियो की शादी करवाकर उन्हें सम्मान भरा जीवन भी दिलाया। और इस वजह से तब से लेकर आज तक इनके विजय की खुशी में लोहड़ी के गीतों में गाया जाता हैं और दुल्ला भट्टी को याद किया जाता हैं।

 

लोहड़ी का त्योहार कैसे मनाया जाता है ?

 

लोहड़ी भाईचारे का संदेश देता है। इस मौके पर लड़कियां आग जलाकर उनके चारों लोहड़ी का गीत गाते हुए अग्नि की परिक्रमा करती है। इसके अलावा सब लोग आग के चारों ओर बैठकर रेवड़ी, गजक और मूंगफलियों का भी भरपूर आंनद लेते हैं।

Last Words:

आशा करता हूँ आप सभी को लोहड़ी क्या है? लोहड़ी क्यों मनाया जाता है? से जुड़े सारे सवालों के जवाब मिल चुका होगा। यदि अभी भी आपको कोई और जानकारी चाहिए तो नीचे कमेंट करके हमसे जरूर पूछिये। आपके हर एक सवाल का जवाब देने की कोशिश करूंगा।

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