निबंध: छात्र और अनुशासन | Chatra Aur Anushasan par Nibandh

निबंध: छात्र और अनुशासन | Chatra Aur Anushasan par Nibandh

दोस्तों नमस्कार आपके exams में कई बार आपको निबंध लिखने के लिए पूछा जाता है। यदि आप भी Discipline यानी कि छात्र और अनुशासन | Chatra Aur Anushasan par Nibandh की तलाश में हो तो आप सभी पाठकों के लिए यहां पे निबंध Provide किया गया है। आप इसे पढ़ सकते हैं, याद कर सकते हैं और अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कर सकते हैं।

Essay on Student Discipline: छात्र और अनुशासन सृष्टि के रचयिता ने जिस सृष्टि की रचना की है , वह इतनी नियमपूर्वक चलती है कि उसके एक एक क्षण का परिवर्तन निश्चित समय पर होता है । सूर्य और चंद्रमा का चमकना , दिन और रात का होना , पेड़ – पौधों पर फल फूल लगना आदि । ये सब कार्य इतने नियमित और निश्चित समय पर होते हैं । जिन्हें देखकर आश्चर्य होता है । सृष्टि का समस्त कार्य एक निश्चित नियंत्रण या ‘ अनुशासन ‘ के अधीन चल रहा है ।

अनुशासन शब्द का अर्थ ही शासन ( आदेश या नियंत्रण के अनुसार चलना है । अनुशासन एक व्यापक तत्त्व है जो जीवन के सभी क्षेत्रों को अपने में समा लेता है । इसके अभाव में जीवन व्यवस्थित रीति से नहीं चल सकता है।

यद्यपि जीवन में पग पग पर अनुशासन का बड़ा भारी महत्त्व है , तथापि विद्यार्थी – जीवन में इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है । विद्यार्थी को अपने भावी जीवन के निर्माण की तैयारी करनी होती है , जो बडा कठोर साधना है । इसके लिए विद्यार्थी का अनुशासित जीवन व्यतीत करना अनिवार्य है ।

अनुशासन में रहनेवाला बालक ही देश का सभ्य नागरिक बन सकता है और वही स्वयं को अपने परिवार को तथा स्वदेश को उन्नत बनाने में सहयोग दे सकता है । भारत को प्राचीन ऋषियों और आचार्यों ने जीवन को चार भागों में बाँटा था और इनमें से प्रथम ब्रह्मचर्य आश्रम को जीवन का मूल आधार माना था । इसमें विद्यार्थी भावी जीवन के निर्माण के लिए कठोर साधना करता था । गुरु का अपना चरित्र बड़ा ही प्रभावशाली और अनकरणीय होता था ।

Chatra Aur Anushasan par Nibandh in Hindi

विद्यार्थी उसकी संरक्षण में रहकर पूर्ण अनुशासन से जीवन व्यतीत करना सीखता था । उसका अपने आहार – विहार , परिधान , निद्रा आदि सब पर पूर्ण नियंत्रण रहता था । बालक के मान रूपी हीरे को साधना – मंत्र द्वारा तराशा और चमकाया जाता था , ताकि बड़ा होकर वह समाज को प्रकाश दे सके . उसे उचित मार्ग पर ले जा सके । यही कारण था कि उसे समय का विद्यार्थी सच्चरित्र , गुरु में अटूट श्रद्धा रखने वाला और बड़ों की आज्ञा का पालन करने वाला होता था और अपने भावी जीवन में राष्ट्र की उन्नति में महत्त्वपूर्ण योगदान देता था ।

जब चारों ओर से घोर नैतिक पतन हो रहा है , उसमें भ्रष्टाचार का बोलबाला है । ऐसी दशा में आंतरिक अनुशासन और व्यवस्था की कल्पना तभी साकार हो सकेगी , जब हमारे हृदय में परिवर्तन हो और हृदय परिवर्तन का श्रेष्ठ समय विद्यार्थी जीवन है । विद्यार्थी का मान एक सुंदर पुष्प है , जिसे साधना रूपी धूप और विचार रूपी जल देकर पूर्ण विकसित करना होता है , ताकि उसकी सुगंध से सारा समाज सुगंधित हो जाय । यदि यह पुष्प अनुशासनहीनता के दल में पड़ गया तो निश्चित ही इसकी दुर्गंध से सब परेशान हो उठेगे ।

आज छात्रों की अनुशासनहीनता देश के लिए एक ज्वलंत समस्या है । विद्यालय , महाविद्यालय , विश्वविद्यालय में उदंडता दिखाना , शिक्षकों का अपमान करना और परीक्षा में नकल करना और कराना , रोकने पर निरीक्षकों को पीटना या उनकी जान ले लेना , बसों , रेलों में बिना टिकट यात्रा करना , छात्राओं के साथ छेड़खानी करना उनकी अनुशासनहीनता के नमूने हैं । अत : विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण के लिए नैतिक शिक्षा पर विशेष बल दिया जाना चाहिए ।

देश में वर्तमान शिक्षा – व्यवस्था अत्यंत त्रुटिपूर्ण है । छात्र को अपना भविष्य अंधकारमय दिखाई देता है । फलस्वरूप वह हिंसा और तोड़ – फोड़ पर उतारु हो जाता है । देश के विद्यार्थी में अनुशासन की पुनः स्थापना के लिए शिक्षा पद्धति में परिवर्तन किया जाना चाहिए , ताकि उसमें विश्वास पैदा हो और वह एक सभ्य नागरिक के रूप में समाज के सामने आए ।

हमारे देश में प्रजातंत्र शासन व्यवस्था है , जिसमें सत्ता प्रजा के हाथों में होती है , उसे ही राष्ट्र निर्माण के लिए भावी नीतियों का निर्धारण करना है । इसके लिए अनिवार्य है कि आज का विद्यार्थी अनुशासित होकर आगे बढे , ताकि उनमें सच्चरित्रता , धैर्य , साहस , उत्साह , विश्वास तथा कर्तव्य परायणता की भावना जागे ।

सैनिक अनुशासन को सदा से ही आदर्श अनुशासन माना गया है , परंतु उसका मूल आधार भय और दंड व्यवस्था होते हैं । प्रजातंत्र की सफलता के लिए जनता में उच्च स्तर का अनुशासन होना जरूरी है । अत : विद्यार्थी जीवन में ही व्यक्ति में उसकी नींव पड़ जानी चाहिए । छात्रों में इस अनशासन की स्थापना का भय या कठोर दंड व्यवस्था से नहीं , अपितु उनके हृदय में सोये हए सद्विचारों को जगाकर की जा सकती है ।

अनुशासन जीवन को इतना आदर्श बना देता है कि अनुशासित व्यक्ति दूसरों की अपेक्षा कुछ विशिष्ट दिखाई पड़ता है । उसका उठना – बैठना , बोलना , व्यवहार करना आदि प्रत्येक क्रिया में एक विशेष व्यवस्था या नियम की झलक मिलती है । अपनी समस्त वृत्तियों पर उसका पूर्ण नियंत्रण रहता है । संसार में वह कुछ विशेष कर सकने की क्षमता रखता है । उसका सब ओर सम्मान होता है तथा उसके चरण चूमती दिखायी देती हैं ।

अनुशासनहीन मनुष्य संसार में Jलेशमात्र भी सफल नहीं होता , बल्कि वह अपने पतन के साथ ही साथ समाज का भी विनाश करता है । अनुशासित जीवन ही वास्तविक जीवन है , अनुशासनहीनता मौत है । आज के अधिकांश छात्रों में इसका अभाव दिखाई दे रहा है । अत : उन्हें अनुशासन में रहना ही होगा ।

यदि आज के छात्र, जो देश के भावी कर्णधार हैं अपने को अनुशासित रखने में सफल हो सके तो उसमें उनका अपना कल्याण होगा। अनुशासन के नींव पर ही सफलता का विशाल महल बन सकता है। और अनुशासित होकर ही अपने जीवन में सुख, शांति, और ऐश्वर्य की उपलब्धि प्राप्त की जा सकती है।

Last Words:

आशा करता हूँ आपको हमारा यह पोस्ट “ निबंध: छात्र और अनुशासन | Chatra Aur Anushasan par Nibandh ” पसंद आया होगा। आपका कोई भी सुझाव है तो हमें कमेंट करें और अपने दोस्तों के साथ शेयर करें।

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